Short Motivational Story in Hindi

हम यहाँ हर रोज एक नई “Short Motivational Story In Hindi” यहाँ अपने रीडर्स के लिए यहाँ जोड़तें हैं।

मित्र की परख

एक दिन रामू-श्यामू नामक दो दोस्त एक जंगल से होकर गुजर रहे थे। उन दोनों में गहरी मित्रता थी और दोनों ही एक-दूसरे के लिए जान देने की बात करते थे।

जंगल से जाते वक्त उन्हें एक रीछ (भालू) दिखाई दिया। वह उनकी तरफ ही आ रहा था। श्यामू तुरंत भाग कर पास के एक पेड़ पर चढ़ गया। उसने अपने मित्र रामू की बिल्कुल भी चिन्ता नहीं की। श्यामू बोला- “भाई रामू जान है तो जहान है। तुम भी अपने बचाव का कोई रास्ता खोजो।” रामू भला क्या रास्ता खोजता उसे पेड़ पर चढ़ना भी नहीं आता था। अचानक उसे एक बात बाद आई कि रीछ मरे हुए लोगों को नहीं खाता। इसलिए वह मुर्दे की तरह चुपचाप जमीन पर लेट गया। रीछ रामू के पास आया और उसके चेहरे को सूंघा। उसने समझा कि वह कोई मुर्दा है। अतः वह चुपचाप आगे बढ़ गया। जब रीछ कुछ दूर चला गया, तो रामू उठकर खड़ा हो गया और श्यामू भी पेड़ से नाचे उतर आया। उसने रामू से पूछा, “रीछ तुम्हारे कान में क्या कह रहा था, मित्र ?” रामू ने जबाव दिया, “वह कह रहा था कि स्वार्थी मित्रों से दूर रहो।”

रात में चहकने वाली बुलबुल

पिंजरे में बंद एक बुलबुल हमेशा रात के समय ही चहका करती थी। एक उल्लू रोज उसे ऐसा करते देखता और हैरान रह जाता। जब उससे रहा नहीं गया तो बुलबुल से इसका कारण पूछा। “मुझे बहेलिए ने दिन में उस समय पकड़ा था।, जब मैं चहक रही थी। इसलिए मैं इस पिंजरे में कैद हूं।” बुलबुल ने बताया- “इसी से मैने सबक सीखा सदैव सचेत रहना चाहिए। यही कारण है कि मैं दिन छिपने के बाद ही चहकती हूं।” लेकिन अब ऐसा करने से क्या होगा ?तुम तो पिंजरे में कैद हो चुकी हो।” उल्लू बोला- “अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत (तुम पहले ही यह सावधानी बरततीं, जो अब बरत रही हो तो तुम्हें यह दिन देखना ही नहीं पड़ता)।”

रोटी के बटवारे की कहानी

दो बिल्लियां भूख से बिलबिला रहीं थीं। तभी उन्हें रोटी का एक टुकड़ा मिल गया। दोनों उस पर अपना हक जमाने लगीं। पहली बिल्ली ने कहा चलो मिल बाँटकर खाते है। दूसरी बिल्ली ज्यादा चालाक थी वह सारी रोटी खुद खाना चाहती थी, उसने मना कर दिया। उसी समय एक बन्दर वहाँ से जा रहा था। दोनो ने उसे रोककर कहा -बन्दर भाई अब तुम ही हमारा फैसला करो। बन्दर ने कहा कि इस रोटी का बराबर बंटबारा होना चाहिए। बंदर ने कहा-कि मै इसके बराबर टुकड़े करके तुम दोनो को बराबर हिस्सा दूंगा।

बंदर ने रोटी के दो टुकड़े किए। दोनो को बारी-बारी से देखते हुए बोला एक टुकड़ा दूसरे से बड़ा है। फिर उसने बड़े टुकड़े मे से कुछ हिस्सा खा लिया इसी तरह बन्दर हर बड़े टुकड़े मे से थोड़ा-थोड़ा हिस्सा खता रहा। आखिर में रोटी के सिर्फ दो टुकड़े ही बचे। यह देखकर बिल्लियां बोलीं- बन्दर भाई हमारी रोटी वापस कर दो, हमको फैसला नही कराना है। बंदर उनकी बात सुनकर हंसकर बोला, ओ हो-हो! अब इतने छोटे-छोटे टुकड़े मैं तुम्हें कैसे दे सकता हूँ, यह तो मेरा मेहनताना हैं। यह कहकर उसने वे दोनो बाकी बचे टुकड़े भी अपने मुँह में डाल लिए और चलता बना। बिल्लियां बेचारी मन मसोस कर रह गईं।

समझदार किसान

एक किसान को नदी पार करनी थी। उसके पास एक शेर, एक घास का गट्ठर और एक बकरी थी। नदी पार करने के लिए घाट पर एक छोटी सी नाव खड़ी थी। एक बार में सिर्फ दो लोग ही उसमें सवार होकर जा सकते थे। किसान ने सोचा कि क्या करूं? मैं यदि पहले शेर को ले जाता हूं तो बकरी घास खा जाएगी। यदि घास ले जाता हूं तो शेर बकरी को खा जाएगा। इसी उधेड़बुन में डूबे किसान को एक उपाय सुझा। किसान पहले बकरी को लेकर चला और उस पार छोड़ आया। फिर वापस आकर शेर को ले गया। शेर को वहाँ छोड़ा ओरत्वकरी को वापस ले आया। फिर बकरी को वहाँ छोड़ा और घास का गठद्र लेका चला और उस पार छोड़ आया। घास शेर के पास छोड़कर वापस आया और बकरी को ले गया। इस प्रकार बिना किसी नुकसान के उसने नदी पार करली।

अजनबी पर विश्वास की कहानी

यह कहानी मनमोहक स्वर्ण हंसों की है, जो राजमहल के बगल में अनुपम बगीचे में रहा करते थे। एक आदमी उस मनभावन बगीचे में जाता और हंसों के सुनहरे पंखों को इकट्ठा करता था। इस तरह वह उन सुनहरे पंखों को बेचकर बहुत अमीर आदमी बन गया। एक दिन वह बगीचे में गया तो एक कोयल को आम के पेड़ पर बैठकर मधुर गीत गाते देखा। उस आवाज से आदमी इतना मंत्रमुग्ध हुआ कि उसने बगीचे में रहने की इच्छा जाहिर की। लेकिन कोयल को उन सुनहरे हंसों से इतनी जलन हुई कि, उसने झूठ बोला, अगर मैं यहाँ रहती हूँ तो ये हंस मुझे मार डालेंगे। राजा को गुस्सा आया और उसने अपने पहरेदारों को स्वर्ण हंसों को मारने का आदेश दिया। जिस क्षण पहरेदार हंसों के पास पहुँचे, वे उड़ गए। ऊँची उड़ान भरकर उन्होंने कहा, “हे राजा! आप मूर्ख हैं क्योंकि आपने एक अजनबी पर विश्वास किया है। अब हम चलते है। जब तक राजा को अपनी गलती का एहसास होता उससे पहले ही हंस दूर तक उड़कर जा चुके थे।

नीला भेडिया की कहानी

एक दिन एक भेड़िया भोजन की तलाश करते हुए एक गाँव में आ गया। उसने गाँव के ही एक घर में घुसना चाहा, मगर घर में घुसते ही एक आदमी को देखकर वह घबरा गया और अपनी जान बचाने के लिए भागा । दौड़ते हुए, उसने एक खुली हुई खिड़की देखी और झटपट उसमें छलाँग लगा दी। वह रंग से भरी एक बाल्टी में गिर गया और उसका पूरा शरीर नीले रंग का हो गया। फिर आस-पास किसी को न देखकर वह जंगल में भाग गया।

अगले दिन, जंगल के सभी जानवर उसे देखकर चौंक गए। वे शेर के पास गए और नीले रंग के अद्भुत जानवर के बारे में बताया। हिम्मत करके सभी जानवर भेड़िया के पास गए और भेड़िया से पूछा, “तुम कौन हो? और कहाँ से आये हो?” “मैं ईश्वर का दूत हूँ।” ईश्वर ने मुझे यहाँ शासन करने के लिए भेजा है। यह सुनकर सभी जानवरों ने उसे अपना नया राजा स्वीकार कर लिया और सभी के द्वारा उसे विशेष सम्मान दिया जाने लगा। एक रात, सभी भेड़िए जोर-जोर से आवाज करने लगे। यह सुनकर अपनी प्राकृतिक प्रवृत्ति का विरोध करने में असफल नीला भेड़िया भी जोर-जोर से आवाज करने लगा। उसकी रखवाली करने वाले जानवरों ने महसूस किया कि उनका नया राजा भगवान का दूत नहीं बल्कि एक साधारण भेड़िया ही है। क्रोधित होकर सभी जानवर उसके आसपास इकट्ठा हो गए और उसे पीट-पीटकर मार डाला ।

एकता की ताकत की कहानी

बहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में कबूतरों का झुंड रहता था। उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था। तब वे पास के खेतों में भोजन की तलाश में गए। वहाँ उन्होंने अनाज पड़ा देखा। वे सभी वहाँ गए और अनाज को खाना शुरू कर दिया। परन्तु यह नहीं समझ सके कि शिकारी ने जाल लगा रखा था। अतः कबूतर जाल में फँस गये। अचानक एक शिकारी आया और कबूतरों को जाल में फँसा देखकर खुश हो गया।

सभी कबूतर मन से व्याकुल हो गए और डर के मारे अपने पंख फड़फड़ाने लगे। कबूतरों के राजा को पता था कि अगर उन्होंने सामूहिक प्रयास नहीं किया तो वे खुद को जाल से मुक्त नहीं कर पाएँगे। जब शिकारी दूर था तो कबूतरों के राजा ने प्रत्येक कबूतरों के राजा ने प्रत्येक कबूतर को एक साथ उड़ने की सलाह दी। उन्होंने सामूहिक प्रयास किया और जाल सहित उड़ गए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने अपने दोस्त चूहे से कहा, कि वो जाल काट कर हमें जाल से मुक्त कर दे। चूहे ने जाल काट दिया और सभी कबूतरों को जाल से मुक्त कर दिया।

उल्लू और चील की कहानी

एक बार जंगल के राजा शेर महाराज ने फैसला किया कि पक्षियों का भी राजा होना चाहिए। इसलिए, उन्होंने पक्षियों को अपने राजा का चुनाव करने के लिए कहा। सभी पक्षियों ने चील और उल्लू को अपना राजा नामित किया। अगले दिन सभी पक्षी पेड़ के नीचे इकट्ठे हो गए और मतदान शुरू कर दिया। उल्लू और चील दोनों को बराबर वोट मिले। अब, कौआ की बारी थी। वोट निर्णायक उनका मत था। चूँकि कौवा उल्लू का सबसे अच्छा दोस्त था, इसलिए उसे पूरा यकीन था

कि वह चुनाव जीत जाएगा लेकिन कौए ने चील को वोट दिया। चील ने चुनाव जीता और उल्लू कौए के कारण हार गया। कौवे ने उल्लू का विश्वास तोड़ दिया। उल्लू ने कौए से पूछा कि तुमने मेरा भरोसा क्यों तोड़ा? कौए ने कहा, “तुम बदसूरत और अंधे हो। मैं आपको पक्षियों का राजा होने के लिए कैसे चुन सकता था?” यह सुनकर, उल्लू बहुत दुःखी हुआ और उसने कौवे से कहा, कि वह कभी-भी उसे अपना चेहरा न दिखाए। तब से कौवा और उल्लू का बैर चलता चला आ रहा है।

खरगोश और हाथी की कहानी

जून महीने की भीषण गर्मी का दिन था और झील का पानी भी सूख गया था। राजा हाथी ने अपनी प्रजा को बुलाया और कहा, “मैं दूसरे जंगल में एक विशाल झील को जानता हूँ चलो वहाँ चला जाये।” वे उस जंगल की ओर बढ़े और झील के पास पहुँचे। पानी को देखने के लिए सभी हाथी इतने लालायित थे कि वे जाने-अनजाने में बँटकर आपस में बिखर गए और उनमें से कई तो मर भी गए। यह देखकर एक चतुर खरगोश राजा हाथी के पास गया और बोला, “चंद्रमा, ने आपको इस झील के पानी को पीने से मना किया है क्योंकि यह झील चंद्रमा से संबंधित है।” यह दिखाने के लिए हाथी को झील पर ले गया। सभी ने झील में चंद्रमा के प्रतिबिंब की ओर इशारा किया, “यह दृश्य देखकर राजा हाथी गुस्से से काँप रहा था।” राजा हाथी ने चंद्रमा के प्रतिबिंब को पानी में देखा और अन्य हाथियों के साथ जंगल छोड़ने से पहले खरगोश से माफी माँगी। फिर वे सब खुशी से रहने लगे।

बारिश में बंदर और चिड़िया की कहानी

बारिश में बंदर और चिड़िया किसी आम के पेड़ पर एक चिड़िया रहती थी। वह बहुत ही घमंडी थी। उसने तिनके, पत्ते और पंख इकट्ठे करके बड़ी मेहनत से अपना घोंसला बनाया। उसे अपने प्यारे घर पर घमंड था। एक दिन अचानक तेज बारिश होने लगी। सभी पक्षियों और जानवरों ने अपने घरों में शरण ली। तभी एक बंदर दौड़ता हुआ आया और पेड़ के नीचे रुक गया। वह पूरी तरह से भीग चुका था और काँप रहा था। भीगे हुए बंदर को देखकर घमंडी चिड़िया ने कहा, “तुम बहुत आलसी जानवर हो, बारिश के मौसम से पहले तुमने अपना घर क्यों नहीं बनाया? क्या तुम नहीं जानते कि सभी को आश्रय की आवश्यकता होती है? यदि तुमने पहले कड़ी मेहनत की होती और अपने लिए घर बनाया होता, तो आज तुम बारिश से भीग कर कँपकँपी नहीं करते। लेकिन तुम बंदर हो बंदर। सिर्फ इधर-उधर भटकते रहते हो।” बंदर ने इसे अपना अपमान समझते हुए एक झटके में घोंसले को तोड़ दिया। चिड़िया डर गई और पूरी रात बिना घोंसले के भीगकर रोती रही।

समझदार लोमडी की कहानी

एक बार एक शेर और एक शेरनी लड़ाई हो गई। शेर ने चिल्लाकर कहा, “तुम बहुत बदसूरत लग रही हो। मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहता। शेरनी ने कहा, “इस जंगल में मैं हर किसी को अच्छी लगती हूँ। आप यह कैसे कह सकते हैं?’

इतना होने के बाद शेरनी उसी की पुष्टि करने के लिए जंगल में चली गई। पहले वह भेड़ों के पास गई और पूछा- “क्या मैं तुम्हें अच्छी नहीं लगती हूँ?” भेड़ बोली- हे भगवान, मैं हमेशा सच बोलती हूँ और आज भी मैं सच ही कहूँगी, शेरनी ने कहा-“हाँ, बताओ।” भेड़ बोली-

“नहीं, आप अच्छी नहीं लग रही हो।” जिस क्षण भेड़ ने यह कहा, उसी वक्त शेरनी ने भेड़ को मार डाला। फिर उसने भेड़िये से वही सवाल पूछा। शेरनी से डरकर भेड़िया बोला, “हाँ मेडम, इसमें कोई शक नहीं आप बहुत सुन्दर हैं।” शेरनी जानती थी कि भेड़िया झूठ बोल रहा है। इसलिए उसने उसे भी मार दिया। अब लोमड़ी की बारी थी। शेरनी ने फिर उससे वही सवाल किया। लोमड़ी चालाक थी, अतः उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और उन्हें रगड़ना शुरू कर दिया। आँख मलते हुए उसने कहा “आपकी महिमा, मेरी आँखों में कुछ पड़ गया, मैं भी नहीं देख सकती।” शेरनी ने लोमड़ी पर विश्वास किया और उसे जाने दिया। लोमड़ी ने बड़ी चालाकी और बुद्धिमानी से अपनी जान बचाई।

अंधा विश्वास की कहानी

बात बहुत पुरानी है। एक किसान के पास एक बैल था। एक दिन बैल टहलते-टहलते किसी जंगल में पहुँच गया, जहाँ उसकी मुलाकात एक शेर से हुई। फिर कुछ दिनों तक रहने के बाद दोनों काफी घुल-मिल गए और अच्छे दोस्त बन गए। अब वे दोनों एक साथ जंगल में घूमते और एक साथ भोजन करते थे। बैल के साथ शेर की बढ़ती दोस्ती को देखकर सियार को जलन होने लगी। अतः उसने उनकी दोस्ती तोड़ने

की कोशिश की। फिर एक योजना बनाई। सियार सोचने लगा कि बैल और शेर किस दिन दूर-दूर रहते हैं। इत्तफाक से एक दिन बैल शेर से मिलने नहीं आया, तो सियार मौके का फायदा उठाने के लिए शेर के पास गया और बोला, “महामहिम, बैल बहुत चालाक है। वह जंगल का राजा बनना चाहता है और आपको मारने की योजना बना रहा है।” इस बात पर शेर इतना भड़क गया कि वह सीधे बैल को मारने के लिए उसके पास गया और सच्चाई जाने बिना शेर ने बैल पर हमला -कर दिया और उसे मार डाला।

ब्राह्मण और बदमाश की कहानी

एक छोटे से गाँव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह कर्मकांड करके किसी तरह अपना जीवन यापन किया करता था। एक दिन, व्यापारी ने उन्हें अपनी सेवाओं के लिए एक बकरी दी। ब्राह्मण ने अपने कंधे पर बकरी को रखा और अपने घर की ओर चल दिया। और ब्राह्मण एक अमीर रास्ते में दो चतुर बदमाशों ने ब्राह्मण को देखा और बकरी को छीनने के लिए उपाय सोचने लगे। इसलिए वे झाड़ी में छिप की प्रतीक्षा करने लगे। जब ब्राह्मण एकांत स्थान पर पहुँचा, तो पहले गए बदमाश ने ब्राह्मण से पूछा, “तुम यह कुत्ता क्यों लिए जा रहे हो?” ब्राह्मण नाराज हुआ लेकिन अपनी यात्रा के साथ आगे बढ़ा। थोड़ी देर बाद, दूसरा बदमाश ब्राह्मण के पास पहुँचा और पूछा, “तुम गधे को क्यों ले जा रहे हो?” ब्राह्मण डर गया। उसने सोचा, “यह बकरी है या भूत है जो रूप बदल रही है?” उसने बकरी को सड़क के किनारे ही छोड़ दिया और डरकर भाग गया। फिर बदमाश बकरी को ले गए और उस दिन मांसाहारी दावत का लुफ्त उठाए।

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Author

  • Deepshikha choudhary

    Deepshikha Randhawa is a skilled Storyteller, editor, and educator. With a passion for storytelling, she possess a craft of captivating tales that educate and entertain. As trained basic education teachers, her narratives resonate deeply. Meticulous editing ensures a polished reading experience. Leveraging teaching expertise, she simplify complex concepts and engage learners effectively. This fusion of education and creativity sets her apart. Always seeking fresh opportunities. Collaborate with this masterful storyteller, editor, and educator to add a touch of magic to your project. Let her words leave a lasting impression, inspiring and captivating your audience.

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