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घड़ियों की हड़ताल (Chapter-11)

By KahaniVala

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-( रमेश थानवी ) Ramesh Thanvi

Hindi Sahitya me Khaniyon ka Bada mehhatav hai , hindi kahaniyaan bachhon ke mansik vikas ke liye ek unnat or jacha parkha madhyam hai,Yahan Par hmare dwara देश में प्रौढ़ शिक्षा का अलख जगाने वालों में अग्रणी, साहित्य और दर्शन के अध्येता, एक दौर के प्रतिष्ठित साप्ताहिक ‘प्रतिपक्ष’ की टीम के सदस्य और राज. प्रौढ़ शिक्षण समिति के अध्यक्ष रहे “श्री रमेश थानवी” ki ek kahani “घड़ियों की हड़ताल (Chapter-11)” prastut ki gayi hai jo prathmik istar ke bachhon ke liye upyukt hai . Yahan par har kahani ka likhit evam maukhik sansakran uplabdh hai , jisse har ek bacchon ko kahani padhne evam samjhne me asani ho or kahani ka anand liya ja sake.

अध्याय 11

अब बारी थी. नाथद्वारा से आए हुए घड़ीसाज की। नाथद्वारा का घड़ीसाज बूढ़ा है। स्वभाव से धार्मिक है तथा अपने संतोष के लिए श्रीनाथ जी का प्रसाद हमेशा अपने साथ रखता है। दिल्ली आने पर भी समिति के सभी लोगों को उसने प्रसाद बाँटा था और कहा था. “जय श्रीनाथ जी!’

उसके माथे पर लगे तिलक से यह स्पष्ट हो ही गया था कि वह श्रीनाथ जी का भक्त है। वह कुछ कहता उससे पहले ही बीकानेर के बाबा रामनाथ ने सवाल दाग दिया- “आपके यहाँ तो श्रीनाथ जी की कृपा से सभी कुछ ठीक ही चल रहा होगा! “

“नहीं रामनाथ जी ठीक कहाँ चल रहा है घड़ियाँ तो वहाँ भी बंद हैं। घड़ियों ने यहाँ के महतों व पड़ों को चेतावनी दी थी कि वे सभी तीर्थयात्रियों के साथ समान व्यवहार करें। बड़े अफसरों को लाइन तोड़कर सबसे पहले प्रवेश न दें। धन्ना सेठों से पैसा लेकर उन्हें पीछे के दरवाजे से दर्शन न कराएँ, लेकिन घड़ियों की चेतावनी धरी की धरी रह गई और यह सब ऐसे ही चलता रहा। घड़ियों का कहना था कि श्रीनाथ जी के दरवाजे पर भी ऊँच-नीच चलती रही और इन महंतों को श्रीनाथ जी ने सद्बुद्धि नहीं दी, तो पड़ियाँ इसके लिए आंदोलन करेंगी, सत्याग्रह करेंगी। हुआ भी ऐसा ही महंतों व पंडों की नीयत सुधरी नहीं, भेदभाव, ऊँच-नीच चलता रहा और घड़ियों को सत्याग्रह शुरू करना पड़ा। समय का फेर है रामनाथ जी श्रीनाथ जी भी अपने चाकर लोगों के झांसे में आने लगे हैं।” थकी आवाज में नाथद्वारा के घड़ीसाज ने अपनी बात खत्म की।

उसका बयान भी बाकायदा दर्ज हुआ। उसके बाद कानपुर के घड़ीसाज का नंबर था। उससे जब अपनी बात बताने को कहा गया तो उसने कहा-

‘अब कौन से बयान बाकी रह गए सरकार! घड़ियों की हड़ताल 14 का साफ़ कारण तो सामने आ ही गया है। इस पर भी अगर कोई अमल होता है, तो देश की जनता का खूब मला हो जाएगा। हम सब चाहेंगे कि घड़ियों की पीड़ा को समझा जाए। उनकी बातों पर गंभीरता से विचार करके सही समय को लौटाया जाए। यदि इसमें अब थोड़ी भी देर होती है, तो परिणाम बहुत गंभीर होंगे।

कानपुर का घड़ीसाज तुरंत कोई कदम उठाने की बात पर जोर दे रहा था। उसकी बात सभी घड़ीसाजों को सही लगी थी और सबने उसका समर्थन किया था। काठियावाड़ के घड़ीसाज ने भी चेतावनी देते हुए कहा था-

“घड़ियों की माँगें पूरे देश की माँगें हैं। ये माँगें हर मामूली आदमी और उसके परिवार की माँगें हैं। आप फ़ौरन रपट तैयार कीजिए और ‘अर्जेंट का लेबल लगाकर तुरंत उसे चलता कीजिए। सरकार को कहिए कि एक दिन की भी देर न करे।”

काठियावाड़ के घड़ीसाज़ की बात का भी सभी ने समर्थन किया था। लेह लाख के घड़ीसाज ने भी घड़ियों की राय में राय मिलाकर समता के राज की माँग की थी। उसने घड़ियों के साथ ही अपना दुखड़ा रोया था तथा कहा था कि पहाड़ पर रहनेवालों की कौन खैर-खबर लेता है। पहाड़ के बीहड़ जीवन का वर्णन करते हुए वह सरकार से अनुरोध कर रहा था कि समता का राज तुरंत कायम किया जाना चाहिए तथा समाज में सबको सामाजिक न्याय मिलना चाहिए। लेह लद्दाख के घड़ीसाज़ की बात भी दर्ज कर ली गई थी। पूरी समिति की एक राय देखकर सरकारी अफसर ने सारी कार्रवाई लंबी रपट तैयार की थी।

घड़ीसाजों की इस राष्ट्रीय कमेटी की यह लंबी रपट दूसरे दिन ही समय मंत्री को भेंट की जानी थी। समय अब भी लोटा नहीं था। इसलिए यह तय किया गया कि यह समारोह समय भवन के ‘शून्य कक्ष’ में किया जाए। समारोह वहीं हुआ तथा समय-मंत्री को पूरी रपट भेंट की गई। रपट से बात साफ़ थी कि घड़ियों की लड़ाई बुनियादी बातों पर टिकी है और इस लड़ाई में कोई सस्ता समझौता नहीं हो सकता इस बात को ठीक से समझते हुए भी समय मंत्री ने सरकारी तर्ज पर घड़ियों से अपील की थी कि वे अपनी हड़ताल समाप्त कर दें तथा काम पर लौट आएँ। समय मंत्री ने आशा व्य की कि घड़ियाँ उनकी बात मान लेंगी। शून्य कक्ष में उपस्थित सभी पत्रकारों, अफसरों तथा राजनेताओं की सहानुभूति समय मंत्री के साथ थी।

इस संक्षिप्त आयोजन के बाद घड़ीसाजों की इस राष्ट्रीय कमेटी की राय पत्रकारों को बाँट दी गई। पत्रकार पहले से ताक में बैठे थे। 1:3 उतावले हो रहे थे। उन्होंने समारोह के बाद घड़ीसाजों को घेर लिया था। दूसरे सवेरे सारे देश के अखबार सिर्फ इसी खबर से भरे थे। घड़ीसाजों के फोटो भी मुखपृष्ठ पर छपे थे। पूरे देश की जनता ने जान लिया था कि घड़ियाँ हड़ताल पर क्यों हैं।

घड़ियों की हड़ताल के सभी भाग यहाँ देखें !

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